ऋषिकेश-परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने सेना दिवस पर दी शुभकामनाए
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश – भारत में हर साल 15 जनवरी को सैनिकों और भारतीय सेना के सम्मान में सेना दिवस मनाया जाता है। भारत आज अपना 73 वां भारतीय सेना दिवस मना रहा है ।
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत की आत्मा का सुरक्षा कवच है हमारी सेना आईये हम सभी देशवासी उन बहादुर सैनिकों को सलाम करते हुए उनकी शहादत को नमन करते हैं जिन्होंने देश और देशवासियों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि
भारतीय सेना दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1949 में की गई थी। वर्ष 1949 में भारत के अंतिम ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल फ्रांसिस बुचर द्वारा लेफ्टिनेंट जनरल केएम करियप्पा को भारतीय सेना का कमांडर-इन-चीफ नामित करने की याद में सेना दिवस मनाया जाता है। स्वामी ने कहा कि हमारे सैनिक प्रतिकूल परिस्थितियों में रातदिन सीमाओं पर साहस के साथ खड़े रहते हैं और हम सब की रक्षा करते हैं। उनके पास अत्याधुनिक हथियार हों या न हो परन्तु भारत माता की रक्षा करने वाला साहसी हृदय जरूर है। यह हमारे सेना का साहस ही है कि आज हम सभी सुरक्षित हैं, यह केवल सेना का फर्ज ही नहीं बल्कि एक बड़ी उपलब्धि भी है। उन्होंने कहा कि सैनिक भी किसी संत से कम नहीं क्योंकि सैनिक हमारी सीमाओं की रक्षा के लिये लड़ता है और संत हमारी संस्कृति की रक्षा के लिये जीवन भर प्रयत्न करता है; जीवन भर लड़ता है। हमारी सीमायें बचेगी तो संस्कृति भी बचेगी। सैनिक अपने राष्ट्र की रक्षा के लिये अपनी जान की बाजी लगा देते है। वास्तव में सेना हमारे राष्ट्र की रक्षक है। भारतीय सेना नैतिकता, साहस और वीरता के साथ विश्वशांति और सौहार्द्रता के लिये कार्य करती है। मानवीयता और संवेदना दो बहुमूल्य अस्त्रों को हमारी सेना हमेशा सम्भाल कर रखती है। असीम करुणा और धैर्य के साथ वह हर परिस्थितियों को सँभालते हुये नफरत से ऊपर उठकर मानवता के उच्चतम आदर्शों को स्थापित करने वाली महानतम सेना है भारत की। आज परमार्थ निकेतन गंगा आरती में उन सभी बहादुर सैनिकों को समर्पित की जाएगी जिन्होंने अपने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
