ऋषिकेश- स्वामी समर्पणनंद सरस्वती ने की पंचागनी योग साधना शुरू
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश – हर वर्ष की भारती इस वर्ष भी श्री अवधूत परमहंस स्वामी समर्पनंद सरस्वती पंचाग्नि योग साधना के साथ ही मोहन साधना शुरू कर दी है । विगत 5 वर्षों से यह साधना विश्व शांति, सनातन धर्म तथा भारतीय वैदिक संस्कृति को यह समर्पित है। यह साधना सूर्य भगवान की उत्तरायण में शुरू होकर , दक्षिणायण की पूर्व में पूर्णाहूति होती हैं।यह पंचाग्नि विद्या सुर्य साधना , शिवजी की अघोरा साधना तथा माता काली की अघोरी साधना की रूप में माना जाता हैं। यह पंचाग्नि विद्या, आत्मा और ब्रह्म विद्या को प्राप्ती के साथ,साधकों शिव तत्व को विलिन हो जाते हैं। पंचाग्नि विद्या माता पार्वती जी ने शुरू की थी,शिव तत्त्व में बिलीन होने के लिए। स्वामी समर्पण आनंद सरस्वती ने बताया कि वर्तमान समय में यह साधना अत्यंत आवश्यक हैं विश्व शांति तथा करोना महामारी बिमारी को जड़ से मुक्ति पाने में सहायता मिलेगी और पर्यावरण को शुद्ध बनाने में भी। पंचाग्नि, पांच अग्नि जैसे काम, क्रोध, लोभ, मोह और मद्य के ऊपर अवधूत साधक विजय प्राप्त करता हैं और सारे संसार को कर्म से मुक्ति मिल जाती हैं और शिव तत्त्व में विलीन हो जाते हैं। यह पंचाग्नि साधना सूर्य भगवान , अग्निदेव, शिवजी, परा शक्ती और गुरु देवो की आराधना पण्डित हेमराज जोशी एवं मोहन भट्ट के द्वारा किया गया। इस मौके पर स्वामी विश्वरूपा, स्वामि भावत्मनांद तथा अन्य साधु महात्मा की आशीर्वाद के साथ सुरू हुई और मकर संक्रान्ति पर्व का खिचड़ी प्रसाद के साथ धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर योगाचार्य कपिल देव बिष्ट, योगाचार्य सागर खंडूरी, लक्ष्मण भंडारी, आयुष भंडारी, सिद्धार्थ, संजना बिष्ट, तेजस्विनी बिष्ट और गीता बिष्ट ने सेवा दी।
