ऋषिकेश-आवाज साहित्यिक संस्था ने तुलसी मानस मंदिर में किया काव्य गोष्ठी का आयोजन
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश – समाज के सार्वभौमिक कल्याण एवं देश को कोरोना मुक्त करने की भावना के साथ आवाज साहित्यिक संस्था के द्वारा तुलसी मानस मंदिर में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी में उपस्थित कवियों ने सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनैतिक व वर्तमान समस्या पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।
तुलसी मानस मंदिर में आयोजित काव्य गोष्ठी का शुभारंभ स्वामी अखंडानंद ने दीप प्रज्वलित कर किया गया ।
काव्य गोष्ठी में कवि रामकृष्ण पोखरियाल ने कहा- नए वर्ष में हम देश को कोरोना मुक्त चाहते हैं, इसीलिए मां शारदे के गीत
बाँचते हैं । कवि अशोक क्रेजी ने –
सत्य पथ पर चल सदा, मैं धर्म अनुरागी बनूँ अखंड ज्योति बन
मैं अँधेरा हर सकूँ’ पंक्तियों के साथ जीवन में प्रकाश की कामना की है। कवि प्रबोध उनियाल ने-
आदमी के अंदर, आदमी रहने लगे हैं पहचानो मेरे दोस्त!
बाजारों में चेहरे टंगे हैं , पंक्तियां पढ़कर बनावटी संबंधों को उजागर किया। कवि हेमवती नंदन भट्ट ने अपने उत्तराखंड के सौंदर्य का वर्णन कुछ इस तरह किया- फूलों क बण में मेरु मुलुक खास ऊंची-ऊंची डांड्यूं मा हिमालैक पास । कवि आलम मुसाफिर ने कुछ यूं बयां किया-
कुछ यूं बख्शें हैं , गमें हयात ने
आंखों को आंसू गर तबीयत से निचोड़ दूं तो दरिया बह निकले ।
वैश्विक महामारी को पर कवि महेश चिटकारिया ने अपनी पंक्तियां कुछ यूं कहीं- विकास की दौड़ में बनाए ढेरों परमाणु छोटे से कीटाणु ने पल में बदल दी ये जिंदगी । कवि सत्येंद्र चौहान ने व्यंग में कहा कि- गैरसैंण बीस वर्षों बाद भी ग़ैरसैणी’ जन रैमे
अपनी सैणी ट योंकि वक्त देरादून मा ऐगे । कवि जेपी उनियाल ने अटल बिहारी वाजपेई पर पंक्तियां प्रस्तुत की। काव्य गोष्ठी के संयोजक पंडित रवि शास्त्री ने कहा कि- कवि हमेशा समाज के उत्थान व मानवता के लिए कविताएं लिखते हैं जो प्रेरणा का काम करती हैं।
इस अवसर पर पंडित रवि शास्त्री ने आवाज साहित्यिक संस्था के सभी कवियों को मां भगवती की प्रतिमा एवं उत्तरी ओढ़ाकर सभी सम्मानित कवियों को सम्मानित किया।
