ऋषिकेश- गुणवत्ता, सुरक्षा और उपलब्धता का समग्र दृष्टिकोण हैं जेनरिक दवाएं
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश _ भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाने के लिए जेनरिक दवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन दवाओं का मुख्य उद्देश्य गुणवत्ता युक्त स्वास्थ्य देखभाल को किफायती बनाना है।
25 सितम्बर को विश्व फार्मासिस्ट दिवस है। वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले फार्मासिस्टों का सम्मान करने हेतु इस दिवस को विशेष तौर से मनाया जाता है। लेकिन यह भी जरूरी है कि फार्मासिस्टों के माध्यम से आम लोगों को दवाओं की क्वालिटी और उनकी उपयोगिता की बेहतर जानकारी हो। एम्स ऋषिकेश के औषधि विज्ञान विभाग के हेड प्रोफेसर शैलेन्द्र हांडू बताते हैं कि अधिकांश लोग ब्रांडेड और जेनरिक दवाओं के बीच के अंतर को लेकर भ्रमित रहते हैं। दोनों प्रकार की दवाएं समान सक्रिय तत्वों के साथ बनाई जाती हैं और उनका उद्देश्य भी एक ही होता है, लेकिन ब्रांडेड दवाएं आमतौर पर महंगी होती हैं, जबकि जेनरिक दवाएं सस्ती होती हैं। जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता के बारे में अक्सर सवाल उठते हैं, लेकिन यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि किसी भी जेनरिक दवा को बाजार में उतारने से पहले कठोर परीक्षणों से गुजरना पड़ता है। जेनरिक दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इनका परीक्षण और मूल्यांकन करना जरूरी होता है। यह दवाएं उन ब्रांडेड दवाओं की तरह ही होती हैं, जिनकी पेटेंट अवधि समाप्त हो चुकी होती है। विभाग के आचार्य और एम्स में प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र के प्रभारी डॉ. पुनीत धमीजा ने बताया कि मेडिकल स्टोरों में दोनों ही प्रकार की दवाएं मिलती हैं। ब्रांडेड दवाएं वह होती हैं जिन्हें किसी फार्मास्युटिकल कंपनी द्वारा विशेष नाम के तहत बेचा जाता है। वह आमतौर पर महंगी होती हैं क्योंकि उनकी मार्केटिंग, प्रचार-प्रसार और आरंभिक अनुसंधान में भारी निवेश किया जाता है। दूसरी ओर, जेनरिक दवाएं उन्हीं सक्रिय अवयवों के साथ बनाई जाती हैं लेकिन वह बिना ब्रांड के होती हैं और अपेक्षाकृत सस्ती होती हैं। डॉक्टर धमीजा ने कहा कि इन दवाओं के सेवन से यदि किसी भी प्रकार का साईड इफेक्ट होता है तो टोल फ्री नंबर 1800 180 3024 पर शिकायत दर्ज की जा सकती है।
