ऋषिकेश-जिला गंगा सुरक्षा समिति की वर्चुअल बैठक में पर्यावरणविद् विनोद जुगलान ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश – जिला गंगा सुरक्षा समिति की पाक्षिक वर्चुअल बैठक में समिति के नामित सदस्य पर्यावरण विद विनोद जुगलान ने वीर पुर खुर्द से लेकर खदरी खड़क माफ के समीप गंगा कैचमेंट एरिया में बाढ़ सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष श्रीवास्तव से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की बाढ़ सुरक्षा को चक डैम सुरक्षा तटबन्ध बनाने और गंगा के तटीय क्षेत्र के निकट पौधा रोपण का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश वीर पुर खुर्द से लेकर खदरी के गंगा तटीय क्षेत्र को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में न केवल ऋषिकेश वन क्षेत्र की कुछ भूमि गंगा से लगती हुई खाली पड़ी है बल्कि खड़क माफ ग्राम पंचायत की भी लगभग 11 एकड़ भूमि खाली पड़ी है।जिस पर जल स्तर बढ़ने से आसपास बाढ़ का खतरा बना रहता है। ऐसे में यदि उक्त भूमि पर चक डैम बनाने के बाद पौधा रोपण किया जाता है तो न केवल बाढ़ प्रभाव की संभावनाएं कम होंगी बल्कि गंगा कैचमेंट क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण में भी ममद मिलेगी। सुझाव का स्वागत करते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने त्वरित संज्ञान लेते हुए सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता डीके सिंह को वन विभाग के अधिकारियों सहित उक्त क्षेत्र का भौतिक निरीक्षण कर कार्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। इसी क्षेत्र के निकट राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान खदरी श्यामपुर भी बना हुआ है। यदि बाढ़ सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध होजाते हैं तो गंगा के इस तटीय क्षेत्र की पर्यावरण की दृष्टि से महत्ता और भी बढ़ जाएगी। इससे वन्यजीवों के आवासीय क्षेत्र में घुसपैठ पर भी रोक लग सकेगी। इसके अतिरिक्त नगर निगम ऋषिकेश के मुख्य नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वीरियाल ने बताया स्मृतिवन ऋषिकेश में दो अलग-अलग महिला और पुरुष शौचालय बनाने के संदर्भ में टीएचडीसी से अनुबंध किया गया है। शीघ्र ही प्रीफेब्रिकेटेड शौचालयों का निर्माण सीएसआर के तहत टीएचडीसी द्वारा कराया जा सकेगा। इसके साथ ही त्रिवेणी घाट के समीप गंगा अवलोकन केंद्र के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रतीक्षा की जा रही है। इसके अतिरिक्त मायाकुंड, सर्वहारा नगर, बापू ग्राम में सीवरेज नालों को तुरन्त प्लग करने के निर्देश जारी किए। वन प्रभाग देहरादून के उप प्रभागीय वनाधिकारी बीबी मर्तोलिया ने बताया की समिति का त्रैमासिक समाचार पत्र संपादन के अंतिम चरण में है। समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी देहरादून ने ऋषिकेश अंतर्गत पौराणिक नदियों को नाला कहकर संबोधित करने और सरकारी प्रपत्रों में इन नदियों को नाला शब्द के प्रयोग करने पर पूर्ण रूप रोक लगाने के निर्देश दिए।जिलाधिकारी ने कहा कि इसके बाद भी यदि पौराणिक नदियों के नाम के साथ यदि किसी भी विभाग द्वारा नाला शब्द प्रयोग किया जाता है तो कार्यवाही होगी। गंगा सुरक्षा समिति के नामित सदस्य विनोद जुगलान ने पौराणिक नदियों को सरकारी विभागों द्वारा नाला शब्द के प्रयोग करने पर न केवल आपत्ति जताई थी बल्कि इसे सनातन संस्कृति की आस्था पर चोट बताया था।जिसका जिलाधिकारी ने बैठक में संज्ञान लिया था। वर्चुअल बैठक में सीडीओ निकिता खण्डेलवाल, एनआईएच रुड़की के वैज्ञानिक डॉ आरपी पाण्डेय, डीडीओ सुशील मोहन डोभाल, उपजिलाधिकारी ऋषिकेश वरुण चौधरी, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक अधिकारी एसएस चौहान, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता डीके सिंह,नमामि गंगे अनुरक्षण एवं निर्माण इकाई गंगा के परियोजना प्रबन्धक एके चतुर्वेदी,जल संस्थान ऋषिकेश के उपखण्ड अधिकारी हरीश बंसल,सिंचाई विभाग के ए ई अनुभव नौटियाल प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
