ऋषिकेश- भागवत से ही कलयुग मे मुक्ति -संत दुर्गेश आचार्य

त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश – जीव का धर्म परमात्मा को पाना है, चौरासि लाख योनियो में प्रभु पाने के लिए भाग रहे है लेकिन आज सौभाग्य से हमे श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से मनुष्य योनि में सुलभ हुआ है।छिद्दारवाला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण कराते हुए राष्ट्रीय संत डॉ दुर्गेश आचार्य महाराज ने कहा कि हम अपने बच्चों को संस्कारित करें उनका नाम प्रभु के नाम से रखें। अजामिल ने नारायण नाम रखने से ही बैकुंठ पाया ब्रतासुर ने हरिनाम से प्रभु को पाया। आज आसुरी ब्रिति ब्रितासुर रूपी मांस आहार से मुक्ति प्रभु नाम जप प्रभु भक्ति कथा श्रवण से ही संभव है।हिरण्याक्ष रूपी स्वर्ण धन आसक्ति व हिरण्यकश्यप देहाभिमान प्रह्लाद रूपी आनंद मयी भक्ति से ही संभव है।जब समाज मे सात्विक बृत्ति तामसी बृत्ति से लोग मिलकर अमृत प्रकट करने हेतु समाज में भेद भाव रूपी बिस का पान कर आत्मसात करेंगे समाज मे प्रेम भाव समरसता आएगी तभी अमृत रूपी प्रेम राम राज्य की कल्पना साकार होगी। सूर्य जैसे तेजस्विता व चंद्रमा रूपी अम्रुत के द्वारा ही समाज मे भगवान कृष्ण का प्रेमावतार होगा। अतः भागवत कथा का लक्ष्य समाज मे प्रेमावतार कृष्ण ओर मर्यादा पालक राम राज्य को यथार्थ के धरातल पर लाना है। कथा श्रवण करने वालों में आचार्य रमेश पैन्यूली, आचार्य जितेंद्र नौटियाल, कृष्णा मिश्रा, रवि पोखरियाल, प्रधान नीरज मोहन ध्यानी, रमेश रावत, मोहन सिंह, उत्तम सिंह, जगमोहन सिंह, दिनेश सिंह आदि मौजूद थे ।

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