ऋषिकेश- नगर निगम के खिलाफ हरिद्वार रोड सड़क(NH)से हटाये गये व्यापारियो ने दिया धरना

त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश – एनएच हरिद्वार रोड से हटाए गए दुकानदारों ने नगर निगम के विरुद्ध जमकर प्रदर्शन कर धरना दिया।
दुकानदारों का कहना है कि उच्च न्यायालय के आदेश पर हरिद्वार रोड पर पिछले 50 सालों से निर्मित पीडब्ल्यूडी ऑफिस के आगे सभी दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। लोग दुकान टूट जाने के बाद सड़कों पर आ गए है।
वही कोरोना लॉकडाउन के समय कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षा हेतु जीवनी माई रोड पर पिछले 40 सालों से स्थापित सब्जी मंडी को हटा दिया गया जिसके बाद सैकड़ों सब्जी व्यापारी बेरोजगार हो गए । इसको लेकर सभी व्यापारियों ने नगर निगम के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। वही वोट बैंक की राजनीति के चलते नगर निगम को बैकफुट पर आना पड़ा। आलम यह है कि नगर निगम के सामने नेशनल हाईवे के किनारे एनएच विभाग द्वारा अतिक्रमण की वजह से दुकानें तोड़कर के एनएच को खाली कराया गया था। वहां पर नगर निगम द्वारा सब्जी विक्रेताओं को बसाने की तैयारी चल रही है । आज सुबह जब कुछ व्यापारी वहां पर सब्जी की दुकान लगाने पहुंचे तो सड़क के किनारे से हटाए गए व्यापारियों और सब्जी विक्रेताओं के बीच में नोकझोंक शुरू हो गई, व्यापारियों ने आरोप लगाया कि एक तरफ तो नगर निगम ने सैकड़ों दुकानदारों को अतिक्रमण के नाम पर उजाड़ दिया । वहीं कुछ लोगों से पैसा लेकर अब एनएच के किनारे स्थापित कर रही है और माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कर रही है। इसी को देखते हुए राज्य मंत्री कृष्ण कुमार सिंघल, कांग्रेस पार्टी के राजपाल खरोला, जयेंद्र रमोला सहित तमाम लोग धरना स्थल पर बैठ गए और नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। वहीं ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य जयेंद्र रमोला ने आरोप लगाया कि तीर्थ नगरी ऋषिकेश में भारतीय जनता पार्टी की मेयर और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के बीच में एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ लगी हुई है। इसी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। यदि नगर निगम द्वारा एनएच के किनारे किसी भी तरह का अवैध अतिक्रमण कराया गया तो उसके लिए वह किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता विरोध के लिए सड़क पर उतरेगे वही याचिकाकर्ता अनिल गुप्ता ने कहां की उच्च न्यायालय के आदेश पर ही एनएच विभाग द्वारा सड़क के किनारे अतिक्रमण हटाया गया था। यदि दोबारा अतिक्रमण कराया गया तो संबंधित विभाग के खिलाफ उच्च न्यायालय में जाएंगे और न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने के आरोप में विभाग के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे।

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