ऋषिकेश- सनातन धर्म को जीवित रखना है तो धर्म के कार्यो को करते रहना चाहिए — आचार्य मुकेश बडोनी
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश- आचार्य मुकेश बडोनी ने कहा कि सनातन धर्म जीवित रखना है तो धर्म के कार्य करना चाहिए। धर्म ही पुराण है जो सत्य है जो वेद का फल है वहीं सिर्फ भागवत महापुराण है। पार्वती माता ने भगवान शिव जी से अमर कथा को श्रवण किया था। महर्षि वेदव्यास ने चार वेद छह शास्त्र एक इतिहास जो महाभारत बना 17 पुराण लिखें तब भी मन संतोष नहीं हुआ तब नारद जी ने भगवान की महिमा बतायी तब भागवत महापुराण महर्षि वेदव्यास ने लिखी तब मन संतोष हुआ जो शुकदेव जैसे परमहंस ने गाया है। भागवत में 18000 श्लोक हैं 12 स्कंध है 335 अध्याय हैं भागवत में साक्षात कृष्ण जी हैं।

आचार्य मुकेश बडोनी ने हनुमंत पुरम गंगानगर हटवाल पार्क में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ कथा के दूसरे दिन श्रवण करते हुए रसमयी कथा से श्रद्धालुओं को भाव विभोर किया। कहा कि सूत जी ने भागवत सत्य रूपी गंगा है जिसमें पुराणों ने महिमा गायी है धर्म ही पुराण हैं । गुरु की महिमा बताई शुकदेव जी आत्मकथा महर्षि वेदव्यास जी ने वेद पुराणों व शास्त्रों की रचना की। महर्षि वेद व्यास जी का मन असंतोष होना तब भागवत ग्रंथ की रचना की। तब पुत्र शुकदेव जी को श्रवण कराया तब पांडव चरित्र श्रवण कराया, कुन्ती ने श्री कृष्ण का स्मरण किया, भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को ज्ञान दिया कि अब तुम राजा बन गए हो ओर उनको दान की महिमा बतायी। परीक्षित का जन्म व कृष्ण का फिर द्वारिका जाना 7 मास में अर्जुन वापिस आता है। तब पांडव का स्वर्ग को जाना परीक्षित का महाराज बनना तब संत का अपमान करना, श्रृंगी का श्राप परीक्षित को 7 दिन मरने का, तब परीक्षित ने जन्मेजय को राजगद्दी सौंपी , स्वयं शुक्रताल जाना तब संतों का आना फिर शुकदेव का आगमन , तब परीक्षित का श्रीमद्भागवत पुराण श्रवण करना। दूसरे स्कंध में बताया आसन जीतो संग अच्छा करो इंद्रियों को जीतो अपने श्वास को जीतो ब्रह्मा की सृष्टि फिर संत कुमारो और शंकर जी 10 मानस पुत्रों की सृष्टि, फिर मनु सतरूपा का जन्म तब पृथ्वी को हिरण्याक्ष ने सूतल लोक ले जा रखी थी। तब ब्रह्मा को छींक आना, तब भगवान वराह का जन्म, तब वराह भगवान ने हिरण्याक्ष का वध करके , तब पृथ्वी को स्थापित किया तब मनु महाराज जी की तीन पुत्री और दो पुत्र हुए। सबसे पहले मंझली पुत्री देवहूति का चरित्र श्रवण कराया, देवहूति का विवाह कर्दम जी से हुआ, और कर्दम जी की समाधि लग गई, तब देवहूति ने अपने स्वामी की बहुत वर्ष तक सेवा की । तब नौं पुत्री का जन्म, तब कपिल भगवान का जन्म , तब ब्रह्मा जी का आना, अपने नौ मानस पुत्रों का विवाह कर्दम जी की नौ कन्याओं से कराया। अपने आप कर्दम जी वन में गए । तब कपिल देव ने मां देवहुति को ज्ञान दिया और तब देवहुति धन्य हो गई।
श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य मुकेश बडोनी के साथ दीपराज सेमवाल, बृजमोहन रतूड़ी, सुशील उनियाल, शुभम भट्ट, अमन डोभाल, देशराज सेमवाल, आदि ने सुंदर संगीत देकर कथा में भाव विभोर कर दिया। श्रीमद् भागवत कथा में गंगा नगर क्षेत्र की पार्षद उमा बृजपाल राणा, पूर्व सभासद बृजपाल राणा, पितांबर दत्त बिज्लवान, कृष्ण किशोर सचदेवा, अभिषेक हटवाल, गोपाल सती, मकान सिंह नेगी, संजय खरबंदा, मुंशी राम ब्रेजा, ए के मित्तल ,माथुर सिंह नेगी, कुंवर सिंह, रामप्रसाद सकलानी, एच एस भंडारी, जी एस रावत, रामप्रसाद कंडवाल, इंद्रेश सकलानी, राजेंद्र नेगी, विपिन चौहान, कुशल आनंद कुलियाल, सुरेंद्र कैन्तुरा, श्रीमती विमल ब्रेजा, राधा, नंदा रावत, नेत्री देवी , नीरजा नागपाल, डोली नागपाल, सुचेता रावत, मंजू शर्मा ,रजनी थपलियाल, परमेश्वरी जोशी आदि सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित थे।
