ऋषिकेश-हरीश रावत 8 घण्टे नजरबंद, पूर्व मुख्यमंत्री के आग्रह पर भरा निजी मुचलका
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के काफिले को रोकने के आरोप में हरीश रावत, रमेश पलड़िया और अक्षत पाठक को पुलिस ने पकड़ लिया और 8 घंटे थाने में ही रखा गया। इसको हरीश रावत ने पुलिस पर नजरबंद करने का आरोप लगाया। हरीश रावत ने कहा कि हम राष्ट्रवादी लोग है भारत के संविधान को मानने वाले लोग है। अगर हमने अपने अधिकारों की लड़ाई में कानून का उलंघन किया है तो हमें सजा भी मिलनी चाहिए। हरीश रावत ने कहा कि 10 नंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हल्द्वानी दौरे पर पहाड़ी आर्मी ने उत्तराखंड के फैक्ट्रियों में 70% मूल निवासियों को स्थाई नौकरी का शासनादेश जो स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी सरकार में एक्ट बन चुका है उस शासनादेश को अभी तक लागू नहीं करने के लिए काले झंडे दिखाकर विरोध किया। जिस कारण मुझे (हरीश रावत) मेरे साथी रमेश पलड़िया और अक्षत पाठक के साथ 8 घंटा थाना काठगोदाम में नजर बंद रखा गया। हरीश रावत ने कहा कि मेरा पुलिस प्रशासन से निवेदन था कि यदि हमने कानून का उलंघन किया है तो हमे जेल डालो, अन्यथा बगैर कोई धारा लगाएं छोड़ दो। लेकिन पुलिस प्रशासन ने हमारी बात नही मानी मुझ पर और मेरे साथियों पर शांति भंग की धाराओं में चालान कर दिया और प्रशनल बांड यानी ज़मानत पर छोड़ देने की बात कर रहे थे। मैने बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं किये मैने कहा या तो जेल डालो या फिर कोई धारा नही लगेगी। जैसे जैसे शाम ढलने लगी हमारे समर्थको की भीड़ भी थाने परिसर में बढ़ने लगी। पहाड़ी आर्मी के हरीश रावत ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को जब मामुल हुआ कि हमें 8 घंटे से नजरबंद किया हुआ है, तो पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी स्वयं थाने पहुंच गये। थाने के अधिकारियों से कहा इन्हे क्यों नजरबंद किया है छोड़ दो, अधिकारियों ने कहा हम छोड़ रहे है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से भी यही कहा कि यदि अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ना अपराध है तो मैं यह अपराध बार बार करूंगा। अगर इसमें कही भी कानून टूटा है तो मैं सजा लेने को तैयार हू मगर यह मुझे जेल नही डाल रहे है। पूर्व सीएम हरीश रावत के आग्रह पर मैंने (हरीश रावत) बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए। दोस्तो युवाओं की लड़ाई मै पीछे होने वाला नहीं हूं हर मंच पर युवाओं की आवाज बुलंद होगी।
हरीश रावत ने कहा हम डरने वाले नही डराने वाले है,
पहाड़ के शेर है हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे। जय पहाड़ी जय पहाड़, पहाड़ी आर्मी जिंदाबाद…
जी हाँ दोनों ही हरीश रावत थे। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने वाले भी और पैरवी, समर्थन में पहुंचने वाले भी।
