त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश – उत्तराखंड में आज कोरोना पॉजिटिव के 2630 रिकॉर्ड मामले आये है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कुल मामले अब 124033 हो गए हैं। जिसमें सक्रिय मामलो की संख्या 17293 है, आज 708 लोग ठीक हो चुके है, कुल रिकवर मामलों की संख्या 102367 है। अभी तक 1868 लोगों की मृत्यु हो चुकी है। 30191 लोगों के सैंपल रिपोर्ट नेगेटिव पाए गए हैं। अभी तक कुल 3209126 सैंपल रिपोर्ट नेगेटिव आयी है। 25743 की रिपोर्ट आनी बाकी है। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के ठीक होने की दर घटकर 82.53 % हो गयी है। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के 86 कन्टेनमेंट ज़ोन बन गए है। देहरादून में 41, हरिद्वार में 06, नैनीताल में 26 और पौड़ी में 01 कन्टेनमेंट ज़ोन है। आज उत्तराखंड में 12 कोरोना संक्रमितो की मृत्यु हुई है। जिसमे से एम्स ऋषिकेश सेे 04, 02 कैलाश अस्पताल से , दून मेडिकल में 03 , सिनर्जी अस्पताल धरादूं से 01 और बेस अस्पताल कोटद्वार से 01 की मृत्यु हुई है।
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Previous ऋषिकेश- एम्स में भर्ती कोविड मरीजों की संख्या हुई 199 विनाशकारी साबित हो रही कोविड-19 की दूसरी लहर अत्यधिक तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। खासबात यह है कि इस बार कोरोना का स्ट्रैन बिल्कुल नए रूप में है और इसका वायरस बार-बार रूप बदल रहा है। एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत ने बताया कि कोविड का नया वायरस इतना घातक है कि पहली लहर के वायरस की तुलना में यह लगभग 5 गुना अधिक तीब्र गति से लोगों को संक्रमित करने में सक्षम है। नए स्ट्रेन के शुरुआती लक्षण नजर नहीं आने से संक्रमित व्यक्ति को इलाज के लिए पर्याप्त समय भी नहीं मिल पा रहा है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट बताती है कि भारत में इस बार नए स्ट्रेन का कोरोना वायरस अभी तक 700 से अधिक बार अपना स्वरूप बदल कर लोगों को संक्रमित कर चुका है। उन्होंने कहा कि बेहद खतरनाक गति से लोगों को चपेट में ले रहे इस वायरस से जीवन को बचाने के लिए सभी लोगों को अनिवार्यरूप से मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए व साथ ही आपस में दो गज की दूरी बनाए रखना बहुत जरूरी है। इस मामले में जरा सी लापरवाही एक-दूसरे के जीवन पर भारी पड़ सकती है। लोगों को चाहिए कि अपना इम्यूनिटी स्तर बनाए रखने के लिए कोविड महामारी से दहशत में न आएं और अपनी मानसिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के साथ साथ सरकार द्वारा जारी कोविड गाइडलाइन का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करें। एम्स की कम्युनिटी एवं फेमिली मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर वर्तिका सक्सैना ने कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में बताया कि जिन लोगों को पिछले वर्ष कोविड हो चुका है, उनके लिए यह लहर ज्यादा घातक है। मगर इससे डरने की जरूरत नहीं बल्कि इससे बचाव के उपाय अपनाने की नितांत आवश्यता है। उन्होंने बताया कि इस बार संक्रमित होने वाले लोगों में सूखी खांसी, सिरदर्द, मांशपेशियों में दर्द, सांस लेने मे तकलीफ, सीने में दर्द, सीने में दबाव महसूस होना, जागने में दिक्कत होना, कमजोरी महसूस करना अतिरिक्त लक्षण हैं। जबकि बुखार व खांसी इसके प्राथमिक लक्षण हैं। ऐसे में लोगों को चाहिए कि घर से बाहर निकलते वक्त मास्क का इस्तेमाल करने में हरगिज लापरवाही नहीं बरतें। तेजी से फैलते कोविड संक्रमण के कारणों के बारे उन्होंने बताया कि कोरोना की पिछली लहर के बाद देश में हालात सामान्य होने पर लोगों ने लापरवाही बरतनी शुरू कर दी । मास्क का इस्तेमाल करना बंद कर दिया और बिना किसी सुरक्षात्मक उपायों के एक-दूसरे से मिलने-जुलने लगे। उन्होंने परामर्श दिया है कि 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोग कोविड वैक्सीन जरूर लगवाएं। यह वैक्सीन कोविड संक्रमण की घातकता को कम करने में सहायक है। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश में बने कोविड टीकाकरण केंद्र में रविवार को भी कोरोना वैक्सीन लगाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने परामर्श दिया है कि जिन लोगों को कोविड वैक्सीन लग चुकी है, उन्हें भी अनिवार्यरूप से मास्क का इस्तेमाल करने के साथ साथ आपस में पर्याप्त सामाजिक दूरी बनाए रखने के नियम का पालन करना होगा। इससे बचाव के लिए नियमिततौर पर हाथों की स्वच्छता बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। हाल ही में इंपीरियल काॅलेज, लंदन में हुए शोध के अनुसार कोरोना का नया स्ट्रेन पिछली बार की तुलना में 40 से 70 प्रतिशत तक अधिक संक्रामक है। यह वायरस इतना खतरनाक है कि थोड़ी सी लापरवाही जीवन पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में लोगों को चाहिए कि संक्रमण का जोखिम कम करने के लिए वह अनिवार्यरूप से कोविड वैक्सीन लगवाएं और मास्क का इस्तेमाल करने में बिल्कुल भी लाप