ऋषिकेश- भगवत गीता के संदेश को जीवन में उतारने से ही प्रभु की प्राप्ति संभव – आचार्य दुर्गेश आचार्य
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश – राष्ट्रीय संत आचार्य दुर्गेश आचार्य ने कहा कि भौतिकवादी युग में प्रभु के पावन संदेश को जीवन में उतारने से ही जीव परमानंद ब्रह्म को आ सकता है ।
छिद्दरवाला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन कथा का श्रवण कराते हुए राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज ने कहा कि विश्व ब्रह्मांड में जब हम भगवान को ही देखते है तभी हम वासुदेव कहलाते है। हमारी दृष्टि में जब देव भाव आता है तभी हम देवकी बनते हैं। वासुदेव और देवकी चरित्र बनाने से ही भगवान श्री कृष्ण जीवन में आते हैं । इससे संसार के माया बंधन जंजीर बेड़िया टूट जाती है। इन्द्रियों के द्वारपाल परम विश्राम में सो जाते हैं ये इन्द्रियों तभी तक विषयों की तरफ दौड़ रही है जब तक प्रभु नही मिलते प्रभु के दर्शन पाते ही ये परम शांत हो जाती है। इन्द्रिय रूपी गोपी के प्रभु प्रेम में लीन होते ही जीवन ही वृंदावन धाम बन जाता है। भौतिक वादी युग मे प्रभु के पावन संदेश को जीवन मे उतारने से ही जीव परमानंद ब्रह्म को पा सकता है। कथा श्रवण करने वालों में आचार्य रमेश पैन्यूली, आचार्य जितेंद्र नौटियाल, कृष्णा मिश्रा रवि पोखरियाल प्रधान नीरज मोहन ध्यानी रमेश रावत मोहन सिंह उत्तम सिंह जगमोहन सिंह दिनेश सिंह आदि मौजूद थे।
