ऋषिकेश- पीएम मोदी ने वीर बाल दिवस पर किया साहिबजादों को नमन

त्रिवेणी न्यूज 24
नई दिल्ली _ आज का दिन अंतिम सिख गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादों के बलिदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। वीर बाल दिवस मनाने का उद्देश्य साहिबजादों की शिक्षा, त्याग और निष्ठा से प्रेरणा लेना है। यह दिन बच्चों और युवाओं को सिखाने का अवसर है कि सच्चाई और धर्म के लिए कैसे अपने मूल्यों पर अडिग रहा जा सकता है। साहिबजादों का जीवन हमें यह सिखाता है कि उम्र और स्थिति चाहे जो भी हो, सच्चाई और न्याय के लिए खड़ा होना सबसे बड़ी वीरता है।
आज वीर बाल दिवस है। ये दिन गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की वीरता और बलिदान के नाम समर्पित है। 26 दिसंबर 1705 को सरहिंद के नवाब वज़ीर खान के आदेश पर उन्हें जीवित दीवार में चुनवा दिया गया, क्योंकि उन्होंने इस्लाम धर्म स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। आज के दिन पीएम मोदी ने उनके बलिदान को याद करते हुए एक्स पर लिखा है कि ‘आज वीर बाल दिवस पर हम साहिबजादों की अद्वितीय वीरता और बलिदान को याद करते हैं। छोटी उम्र में, वे अपने विश्वास और सिद्धांतों पर दृढ़ रहे और पीढ़ियों को अपने साहस से प्रेरित किया। उनका बलिदान वीरता और मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का एक ज्वलंत उदाहरण है। हम माता गुजरी जी और श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की बहादुरी को भी याद करते हैं। वे हमेशा हमें एक अधिक न्यायपूर्ण और दयालु समाज के निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन करें।
क्यों मनाया जाता है वीर बाल दिवस _
गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह का बलिदान सिख इतिहास और भारतीय संस्कृति में वीरता और धर्म की रक्षा का अविस्मरणीय उदाहरण है। गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह ने सिर्फ 7 और 9 साल की उम्र में धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था। मुगल शासक वज़ीर खान ने उन्हें इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए विवश किया। साहिबजादों ने इस्लाम धर्म स्वीकार करने से इनकार कर दिया और अपने धर्म और मूल्यों की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान दे दिया। 26 दिसंबर 1705 को को उन्हें दीवार में जीवित चुनवा दिया गया।

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