बीस नये वार्डों से कर वसूलने पर बढ़ेगी नगर निगम की आय,सर्वे के बाद सूची तैयार
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश _ नगर निगम ऋषिकेश बीस नये वार्डों में मौजूद 14 हजार आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों से संपत्ति कर वसूलेगा। नगर निगम ने सर्वे के बाद ऐसे भवनों की सूची तैयार कर ली है। कर वसूलने से निगम के राजस्व में करोड़ों की आय होगी। नगर निगम ऋषिकेश में ग्रामीण क्षेत्र के बीस बीघा, मीरानगर, शिवाजीनगर, मंसादेवी, गुमानीवाला, पशुलोक आदि क्षेत्रों को शामिल करने के बाद वार्डों की संख्या चालीस हो गई है, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र में बीस नये वार्ड शामिल किये गये।
निगम पहले नये वार्डों में करीब दो हजार व्यावसायिक भवनों से ही कर वसूलने की तैयारी कर रहा था, लेकिन अब 14 हजार से अधिक आवासीय भवनों से भी संपत्ति कर वसूलने की तैयारी की जा रही है। निगम ने भवनों से टैक्स वसूली का खाका भी तैयार कर लिया है। इससे लंबे समय से क्षेत्र में निवास कर रहे लोगों को अपनी संपत्ति निगम में शामिल होने का लाभ भी मिल सकता है। क्षेत्र में बड़ी आबादी निवास करती है, लेकिन कुछ अड़चन के चलते उनकी संपत्ति दर्ज नहीं हो पा रही थी। फिलहाल निगम ने कर निर्धारण प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिये भवन स्वामियों से उनकी संपत्ति का ब्योरा मांगा जायेगा।
बीस नये वार्डों से कर वसूलने पर बढ़ेगी नगर निगम की आय,सर्वे के बाद सूची तैयार _
नगर निगम के नये वार्डों के लोग अपनी संपत्ति निगम दस्तावेजों में दर्ज करवाना चाहते हैं, लेकिन जिस भूमि पर वह वर्षों से काबिज हैं, उसमें कुछ दिक्कतें भी हैं। यदि टैक्स जमा होने के बाद उनकी भूमि निगम दस्तावेजों में दर्ज होती है, जो इससे उन्हें बड़ी राहत मिल सकती है। अब देखना यह है कि उनकी भूमि निगम दस्तावेजों में दर्ज करवाने को मानकों में क्या सरलीकरण होगा। फिलहाल निगम ने ऐसे सभी आवासीय एवं व्यावसायिक भवनों की सूची तैयार कर शासन को भेज दी है।
दस्तावेज में संपत्ति दर्ज होने से मिलेगी बड़ी राहत _
ऋषिकेश नगर निगम के नगर आयुक्त शैलेन्द्र सिंह नेगी ने कहा नगर निगम ऋषिकेश ने नये बीस वार्डों से टैक्स वसूलने का खाका तैयार किया है। ऐसे आवासीय भवन जिनकी भूमि की रजिस्ट्री है, वह निगम में स्वेच्छा से टैक्स जमा कर सकते हैं, जबकि व्यावसायिक भवनों से टैक्स वसूली को पहले ही निगम टीम ने सर्वें किया था। ऐसे भवनों की संख्या करीब दो हजार से अधिक है। इसके लिये निगम ने भवन स्वामियों से उनकी संपत्ति का ब्योरा भी मांगा है। ऐसे परिवार स्वयं नगर निगम दस्तावेज में अपनी संपत्ति दर्ज कर टैक्स जमा कर सकते हैं।
