ऋषिकेश- इस साल चंद्र ग्रहण के साथ ही शुरू हो रहा है पितृपक्ष का शुभारंभ
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश _ 18 सितंबर को साल 2024 का दूसरा चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है और इस दिन पितृपक्ष की शुरुआत भी हो रही है। इस बार पितृपक्ष की शुरुआत में चंद्र ग्रहण और समापन के दौरान सूर्य ग्रहण भी लगने जा रहा है। हालांकि भारत में चंद्र ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा लेकिन यूरोप में ज्यादातर देशों में चंद्र ग्रहण पूरा दिखाई देगा। सनातन धर्म में ग्रहण के समय शुभ कार्य करना वर्जित है और पितृ पक्ष के पहले दिन ही ग्रहण लगने जा रहा है तो सवाल यह उठता है कि क्या इस दिन पितरों का श्राद्ध या तर्पण किया जा सकता है। आइए जानते हैं पितृ पक्ष के पहले दिन लग रहे चंद्र ग्रहण को लेकर श्राद्ध और पितरों के तर्पण को लेकर क्या है शास्त्रों में बताया गया नियम और विधान।
18 सितंबर से श्राद्ध पक्ष की शुरुआत _
शास्त्रों में मान्यता है कि पितृगण पितृपक्ष के दौरान पृथ्वी पर अपने परिजनों के यहां लौट आते हैं और सर्वपितृ अमावस्या तक रहते हैं। इसलिए इन दिनों कोई भी ऐसा काम ना करें, जिससे पितृगण नाराज हों। इन दिनों श्रद्धा विश्वास के साथ पितरों का श्राद्ध और तर्पण करना चाहिए, ऐसा करने से पितृ दोष दूर होता है और पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है। पितृपक्ष में द्वार पर आने वाले किसी भी जीव-जंतु को मारना नहीं चाहिए, बल्कि उनके लिए उचित भोजन की व्यवस्था करनी चाहिए।
क्या ग्रहण के समय कर सकते हैं श्राद्ध तर्पण _
पितृपक्ष के पहले दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, ऐसे में बहुत से लोगों के मन में सवाल उठ सकता है कि क्या ग्रहण के समय कर सकते हैं श्राद्ध तर्पण। शास्त्रों के अनुसार, अगर पितृपक्ष में चंद्र या सूर्य ग्रहण लगते हैं तो आप तर्पण या श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि ग्रहण के दौरान श्राद्ध तर्पण करने से सामान्य से कहीं अधिक पुण्य फल की प्राप्ति होती है। दूसरी बात कि चंद्र ग्रहण भारत में मालिन्य मात्र दिखेगा इसलिए इसका सूतक मान्य नहीं होगा। ऐसे में पितृपक्ष की प्रतिपदा और अमावस्या तिथि दोनों पर ही पितृ कर्म करना पुण्यदायी होगा और किसी प्रकार का दोष मान्य नहीं होगा। चंद्र ग्रहण का सूतक काल
साल का दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में मालिन्य अवस्था में देखा जाएगा, जबकि अफ्रीका, साउथ अमेरिका, वेस्टर्न कंट्री और वेस्टर्न यूरोप के देशों में चंद्र ग्रहण पूरी तरह से दिखाई देगा। जब आंशिक चंद्र की शुरुआत होगी, तब तक पूरे भारत में चंद्रमा अस्त हो चुका होगा और सूर्योदय हो गया होगा। उस समय चंद्रमा की चांदनी में केवल कुछ धुंधलापन आएगा। जबकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए इस ग्रहण का सूतक भी नहीं माना जाएगा। आमतौर पर ग्रहण के सूतक काल में मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। सूतक काल ना होने पर श्राद्ध कर्म बिना किसी संशय के किए जा सकते हैं। इस साल पितृपक्ष की शुरुआत में चंद्र ग्रहण और समापन में सूर्य ग्रहण दोनों लगने जा रहे हैं, लेकिन ये दोनो ही ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे।
