ऋषिकेश- अब गंगा बेसिन में सर्दियों में भी रहेगा पर्याप्त पानी

त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश _ ग्लोबल वार्मिंग का प्रकोप झेल रहे गंगोत्री ग्लेशियर का आकार एक साल में 18% बढ़ गया है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इससे इस साल सर्दियों में गंगा में पर्याप्त पानी रहेगा। इससे उत्तराखंड से लेकर बंगाल तक गंगा बेसिन में रहने वाले करोड़ों लोगों को पानी की कमी नहीं होगी। वाडिया इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2023 में गंगोत्री ग्लेशियर में बर्फ का आवरण 83% था, जो जून में 69% रह गया था। पर उच्च हिमालय में अच्छी बर्फबारी हुई, जिससे मार्च 2024 तक ग्लेशियर पर बर्फ का आवरण 86.14% पहुंच गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लेशियर की सेहत सुधरेगी।
गंगोत्री ग्लेशियर की मॉनिटरिंग कर रहे हैं वैज्ञानिक _
ग्लोबल वार्मिंग से गंगोत्री ग्लेशियर पर पड़ रहे असर का अध्ययन करने के लिए भोजवासा व चीड़बासा में अध्ययन केंद्र बने हैं, जहां मौसम, जल और भूकंप विज्ञान की वेधशाला स्थापित की गई है। इससे ग्लेशियर में हिमपात, वर्षा और तापमान का अध्ययन किया जा रहा है। उपग्रह चित्रों का प्रयोग भी हो रहा है।
ISRO का दावा है कि हिमालय में पहचानी गई ग्लेशियल झीलों का आकार बढ़ा है। हिमालय में 9,575 ग्लेशियर, सिर्फ उत्तराखंड में 968 ग्लेशियर मौजूद हैं।
2400 किमी में फैले हिमालय में 9,575 ग्लेशियर हैं। इसमें से 968 उत्तराखंड में हैं। इन ग्लेशियरों से भागीरथी, मंदाकिनी, पिंडर, यमुना, काली, कोसी जैसी7 बड़ी नदियां निकलती हैं। इन नदियों पर 40 करोड़ से ज्यादा लोगों का जीवन निर्भर है।
वैज्ञानिक शोध में साबित हो चुका है कि 87 साल में गंगोत्री ग्लेशियर करीब 1700 मीटर पिघल चुका है। 1935 से लेकर 2022 तक गंगोत्री ग्लेशियर का मुहाना लगातार पीछे खिसका है। ग्लोबल वार्मिंग को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अप्रैल में सैटेलाइट इमेज जारी कर दावा किया है कि हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ISRO का दावा है कि हिमालय में पहचानी गई ग्लेशियल झीलों का आकार बढ़ा है।

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