ऋषिकेश- राज्य स्थापना की 23 वीं वर्षगांठी की पूर्व संध्या पर उत्तराखंड की दशा एवं दिशा पर संगोष्ठी

त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश _ उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियो की ओर से राज्य स्थापना की 23 वीं वर्षगांठी की पूर्व संध्या पर उत्तराखंड की दशा एवं दिशा पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में राज्य आंदोलनकारी का कहना है कि लाठी-गोली और व्यवस्था का उत्पीड़न झेलने के बाद मिले उत्तराखंड राज्य में मूल निवासी स्वयं का ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उत्तराखंड के मूल निवासियों पर स्थायी निवास की स्टेटस थोप दिया गया है। ये व्यवस्थागत धोखा है। इस पर राजनीति का न होना और इसका मुददा न बनना चिंता की बात है। वक्ताओं ने कहा कि इससे साबित हो गया है कि क्षेत्रीयता की पहचान समाप्त करने की व्यवस्था हो गई है। इसका असर भी दिखने लगा है। उत्तराखंड में रोजगार के द्वार बाहर के लोगों के लिए खुल रहे हैं। इस पर आवाज नहीं उठती। आवाज भी एक तरह से बंधक बन गई है। दिल्ली के नारों में जनप्रतिनिधि चुनने की परंपरा बन गई है। इसके दुष्परिणाम लोगों के सामने हैं। राज्य की डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है। राज्य निर्माण के लिए लाठी गोली खाने वालों का मखौल उड़ाने वालों की संख्या बढ़ रही है। जागने की जरूरत है। सख्त भू-कानून के अभाव में हालात क्या हो रहे अब किसी से छीपा नहीं है। सत्ताधीश ऐसे मामलों में दूसरे तरह से सोचने लगे हैं। इससे क्षेत्रीयता का संकट पैदा होने लगा है। गोष्ठी की अध्यक्षता स्वामी ‌केशव स्वरूप ब्रह्मचारी ने की और संचालन एडवोकेट रमा बल्लभ भट्ट ने किया। बैठक में संजय शास्त्री ,बंशीधर पोखरियाल, महिपाल सिंह बिष्ट, मनोज द्विवेदी, विनोद बिजलवान,अधिवक्ता खुशहाल सिंह कलुडा,विमला रावत, , उषा रावत, नीलम बिजल्वाण, अनिता कोटियाल, विशाल मणि पैन्यूली, शूरवीर सिंह चौहान ,सूर्य चंद चौहान विमल बहुगुणा,शशि डंगवाल ,ऊषा भंडारी, अरुण शर्मा, हेमंत , उत्तम असवाल, दिनेश व्यास, गुरु प्रसाद बिजल्वाण, हृदयराम सेमवाल, मदन शर्मा ,गोपाल चौहान, शुभम पोखरियाल, अनीता कोठियाल, लक्ष्मी रतूडी, विनोद ध्यानी, रामकृष्ण पोखरियाल, अनूप जोशी, घनश्याम नौटियाल, गजेंद्र कड़ियाल ,सुरेंद्र भंडारी, महिपाल बिष्ट, सुशील नौटियाल ने विचार व्यक्त किए।

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