ऋषिकेश- आईडीपीएल कॉलोनी में लाल चंदन के पेड़ की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग के हवाले
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश- ऋषिकेश की आईडीपीएल कॉलोनी में लाल चंदन के पेड़ की सुरक्षा की जिम्मेदारी अब वन विभाग संभाल रहा है। यह पेड़ पिछले 15 वर्षों से यहां पर है, इसकी कीमत लाखों रुपए बताई जा रही है। वन विभाग को इसकी जानकारी हाल ही में मिली है। लाल चंदन ज्यादातर आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा पर पहाड़ियों में पाए जाते हैं। वहीं उत्तराखंड की जलवायु और मिट्टी भी लाल चंदन के अनुकूल है। ऋषिकेश की आईडीपीएल कॉलोनी में लगभग 15 साल का लाल चंदन का पेड़ है। इसकी जानकारी मिलने के बाद वन विभाग को पेड़ की सुरक्षा को लेकर चिंता सताने लगी है। क्योंकि लाल चंदन के पेड़ की कीमत लाखों रुपए में है। जानकारी के अनुसार लाल चंदन के पेड़ की कीमत 60 से 90 हजार रुपए प्रति किलो है। आईडीपीएल कॉलोनी में खड़े लाल चंदन के पेड़ की सुरक्षा पिछले 15 सालों से एक व्यक्ति कर रहा है। वन क्षेत्राधिकारी ने पेड़ की सुरक्षा को लेकर मौके पर निरीक्षण किया। उन्होंने कर्मचारियों को लगातार गश्त कर पेड़ की निगरानी करने के निर्देश भी दिए है। बताया जा रहा है कि तस्करों से पेड़ों को बचाने के लिए मौके पर मंदिर निर्माण कराने की बात भी कही जा रही है। दिलचस्प बात यह है कि 15 सालों में लाल चंदन का पौधा पेड़ बन गया है, मगर वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी।
इससे अच्छी बात यह है कि तस्करों की नजर अभी तक इस पेड़ पर नहीं पड़ी है। इस वजह से यह अभी तक सुरक्षित खड़ा है। बता दें कि लाल चंदन को उत्तराखंड की आबोहवा रास आ गई है ऋषिकेश के आईडीपीएल कॉलोनी में लाल चंदन का पेड़ इसकी तस्दीक कर रहा है। अगर उत्तराखंड में भी लाल चंदन को बढ़ावा दिया जाता है तो लोगों के साथ सरकार की आर्थिकी मजबूत होगी और दक्षिण भारत की तरह ही उत्तराखंड लाल चंदन के लिए जाना जाएगा। लाल चंदन का वैज्ञानिक नाम पेरोकार्पस सैंटलिनस है इसके अलावा इसे रक्त चंदन, रतनजलि, रक्तचंदनम, शेन चंदनम, अत्ती, शिवप्पु चंदनम, लाल चंदन, रूबी लकड़ी नाम से भी जाना जाता है। विदेशों समेत कई देशों में लाल लाल चंदन की काफी डिमांड है। वहीं इसकी डिमांड सबसे अधिक चीन में बताई जाती है लाल चंदन का उपयोग दवा या औषधि के रूप में कुछ शारीरिक समस्याओं के निदान के लिए किया जाता है।
