ऋषिकेश- जीवन में सुख प्राप्ति का एक ही मार्ग है गौ सेवा – गोपाल मणि
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश – संत गोपाल मणि महाराज ने कहा कि इस धरती पर भगवान के जितने भी अवतार हुए हैं, सब धर्म रक्षा के लिए हुए हैं। जब-जब धर्म की हानि हुई है, समाज में अधर्म और राक्षस प्रवृत्ति व्यविचार बढ़ा है।
बुधवार को त्रिवेणी घाट पर आयोजित गो कथा के दूसरे दिन गोपाल मणि महाराज कहा कि धर्म की मूलजीवन में सुख प्राप्ति का एक ही मार्ग है गौ सेवा। जो आज का समाज भूल गया है।धार्मिक आयोजन तो बहुत हो रहे है, लेकिन दुर्भाग्यवश धर्म की मूल गौ माता लाखों की संख्या में आज भी कत्लखानों में कट रही है। रामचरितमानस के अंदर रावण का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा रावण ने हमेशा धर्म की मूल गौ माता को खत्म करने का प्रयास किया है। इसलिए रावण उच्चकुल में पैदा होते हुए भी राक्षस कहलाये। अपने ही कर्मो का फल मनुष्य भोगता है न उसे कोई सुख दे सकता है न कोई उसे दुःख दे सकता है। इसलिए हम अपने कर्म के माध्यम से बीज वो सकते है। इस संसार में पाप की कोई कमी नहीं है। लेकिन उन पापों का सर्वथा नाश गौ सेवा से ही हो सकता है। उन्होने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता आज पूरे विश्व में पढी और पढ़ाई जाती है। गीता का प्रादुर्भाव भगवान कृष्ण के श्रीमुख से हुआ है श्रीमद्भगवद्गीता को भगवान कृष्ण ने गौ माता के दूध पीकर ही गाया है। आज जरूरत है कि पुनः अब भारत के लोगों को गौ का दूध पिलाया जाय इसके लिए गौ की रक्षा अतिआवश्यक है। गाय बचेगी तो भारत बचेगा जिस दिन भारत से गौ खत्म हो गयी उस दिन भारत का अस्तित्व भी खतरे में पढ़ जाएगा। आचार्य सीताशरण ने कहा महाराज ने कहा कि “मानव धर्म क्या सिखाता है। मानव धर्म ये नहीं की 24 घंटे खाओ – कमाओ अपने बच्चे को पालों, और सो जाओ ये मानव धर्म नहीं। इसके अलावा भी बहुत कुछ है जो हम नहीं करते, जो हमें करना वो क्या है, दीन दुखियों पर दया करों बने तो सेवा करो। आचार्य सीता शरण ने कथा में भगवान श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। इस अवसर पर महंत शिव प्रसाद सेमवाल, चंदना साधुक, सुमन कुमार साधुका, सावित्री गैरोला, मूंगा देवी, अबल देवी, आचार्य सूरतराम डंगवाल, आचार्य महावीर खण्डूरी, सूरजमणि रतूड़ी, आरके सूरी, सते सिंह गुसाईं, शौभा भंडारी, साब सिंह पंवार आदि मौजूद थे।
