ऋषिकेश- श्रीमद् भागवत कथा श्रवण मात्र से ही मनुष्य का होता है जीवन सफल
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश – कथावाचक राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य महाराज ने कहा कि 84 योनियों को भोगने के बाद मनुष्य जीवन पाने का सौभाग्य प्राप्त होता है। जिसने प्रभु भक्ति में अपने को समर्पित कर दिया उसी का जीवन सफल होता है।
बुधवार को खदरी खड़क माफ में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक राष्ट्रीय संत दुर्गेश आचार्य महाराज ने भक्तों को कृष्ण जन्म की कथा का श्रवण कराया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का मुख्य उद्देश्य धरती पर पनप रहे और धर्म को समाप्त कर धर्म की रक्षा करना था। भगवान श्री कृष्ण ने कंस शुरू पी अधर्मी को समाप्त कर गोकुल वासियों को धर्म के रास्ते पर चलने का मार्ग प्रशस्त किया। कथा वाचक दुर्गेश आचार्य ने कहा कि तामसी प्रवृत्ति के लोग मिलकर अमृत पान करने के लिए समाज के भेदभाव रूपी विश्व का पान कर आत्मसात करेंगे तभी समाज में प्रेम सद्भावना व समरसता आएगी और तभी राम राज्य की स्थापना होगी। कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्म उत्सव पर भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप की झांकी निकाली गई। इस मौके पर सभी भक्तों ने भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप के दर्शन कर फूल वर्षा की। इस मौके पर आचार्य महामाया प्रसाद शास्त्री, कृपाल सिंह पुंडीर, श्रीचंद पुंडीर, देवचंद, नार सिंह आदि मौजूद थे।
