ऋषिकेश- एम्स में महिला जनजागरुकता कार्यक्रम का शुभारंभ 17 को।

त्रिवेणी न्यूज 24 ऋषिकेश – अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश महिलाओं में होने वाले सर्विक्स कैंसर के माम forलों को लेकर चिंतित है। जिसके मद्देनजर संस्थान की ओर से कोविडकाल में वेबिनार के माध्यम से महिला जनजागरुकता अभियान शुरू किया जा रहा है। जिसके मद्देनजर 17 नवंबर को अपराह्न 2 से 3 बजे पहला वेबिनार आयोजित किया जाएगा ।
जिसमें डब्ल्यूएचओ एक्सपर्ट डा.आर. शंकरनारायणन समेत देश के प्रसिद्ध वैज्ञानिक, चिकित्सा विशेषज्ञ,एनएचएम के वरिष्ठ प्रतिनिधि व मेडिकल हेल्थ एंड फेमिली वैलफेयर उत्तराखंड के सदस्य शिरकत कर सामूहिक चर्चा करेंगे। चिकित्सकों का कहना है कि भारत में सर्विक्स कैंसर (बच्चेदानी के मुहं का कैंसर ) के मामले काफी अधिक हैं। चिकित्सक इसकी वजह महिलाओं में अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता की कमी को मानते हैं। एम्स निदेशक प्रोफेसर रवि कांत जी ने बताया कि महिलाओं में बच्चेदानी के कैंसर( सर्विक्स कैंसर) पर शतप्रतिशत नियंत्रण संभव है, बशर्ते बालिकाओं को 9 से 14 वर्ष की उम्र के बीच इस कैंसर की रोकथाम के लिए वेक्सीन अनिवार्यरूप से लगाई जाए। उन्होंने बताया कि महिलाओं में पाया जाने वाला सर्विक्स कैंसर ही एक ऐसा कैंसर है जिसका पूर्ण उपचार संभव है।
निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने बताया कि बालिकाओं व महिलाओं को अधिकतम 26 वर्ष की उम्र तक बच्चेदानी के कैंसर की रोकथाम के लिए वेक्सीन लगाई जा सकती है। मगर 14 वर्ष से अधिक उम्र में वेक्सिनेशन अपेक्षाकृत कम असरकारक होता है। उन्होंने बताया कि यह कैंसर महिलाओं में कब होने लगता है इसका उन्हें पता भी नहीं चल पाता है। उन्होंने बताया कि बच्चेदानी के मुहं से इस कैंसर की जांच की जाती है।
एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2030 तक महिलाओं में बच्चेदानी के कैंसर को समाप्त करने के लिए 90 प्रतिशत तक बालिकाओं में अनिवार्य वेक्सिनेशन और 70 प्रतिशत महिलाओं में इस कैंसर से बचाव के लिए जीवन में 35 से 45 वर्ष की उम्र के बीच कम से कम दो बार सर्विक्स कैंसर की विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच का लक्ष्य निर्धारित किया है। उनका कहना है कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए 9 से 14 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं में वेक्सीन की एक डोज ही पर्याप्त होती है।
एम्स के महिला रोग विभाग की कैंसर विशेषज्ञ डा. शालिनी राजाराम ने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष सर्विक्स कैंसर के करीब एक लाख मामले सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 10 वर्ष पूर्व देश में सर्वाधिक मामले महिलाओं की डिलीवरी के समय मृत्युदर के आते थे, जिसमें प्रतिवर्ष करीब 72 हजार का आंकड़ा था, मगर सरकार की ओर से इसे रोकने के लिए वि​भिन्न स्तर पर जनजागरुकता मुहिम चलाई गई,जिससे इस तरह की मृत्युदर में काफी कमी आई है।
उनका मानना है कि इसी तरह का जनजागरुकता अभियान महिलाओं में पाए जाने वाले सर्विक्स कैंसर को लेकर भी चलाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश की ओर से 17 नवंबर को इस विषय पर वेबिनार का आयोजन किया जाएगा,जिसमें डब्ल्यूएचओ के एक्सपर्ट डा. आर. शंकरनारायणन के अलावा देशभर के विशेषज्ञ चिकित्सक इस बीमारी की रोकथाम को लेकर सामूहिक चर्चा करेंगे। जिसमें विशेषज्ञ वेक्सिनेशन व स्क्रीनिंग के विभिन्न तरीकों पर चर्चा करेंगे। महिलाओं में सर्विक्स कैंसर के प्रमुख लक्षण-
महिलाओं की बच्चेदानी से रक्तस्राव, महिलाओं में संभोग के बाद बच्चेदानी से खून आना, बच्चेदानी से बदबूदार पानी का निकलना आदि। ऐसे लक्षण पाए जाने पर महिलाओं को तत्काल अस्पताल में इसकी जांच करानी चाहिए व विशेषज्ञ चिकित्स का परामर्श लेना चाहिए, साथ ही सर्विक्स कैंसर की रोकथाम के लिए वेक्सीन अनिवार्यरूप से लगानी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

%d bloggers like this:
Breaking News