ऋषिकेश- राजकीय महाविद्यालय में क्षेत्रीय जल गुणवत्ता अनुश्रवण तथा प्रबंधन प्रशिक्षण पर कार्यशाला
त्रिवेणी न्यूज 24
ऋषिकेश-22 मार्च को विश्व जल दिवस के अवसर पर प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट, उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट), उत्तराखंड जल संस्थान द्वारा माइक्रोबायोलॉजी विभाग पंडित ललित मोहन शर्मा कैम्पस ऋषिकेश (श्री देव सुमन उत्तराखंड यूनिवर्सिटी ऋषिकेश परिसर) के तकनीकी सहयोग से एकदिवसीय क्षेत्रीय जल गुणवत्ता अनुश्रवण तथा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर के मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी विभाग के सभागार में संपन्न हुआ।कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में डिपार्टमेंट ऑफ मेडिकल लैब टैक्नोलॉजी, पंडित ललित मोहन शर्मा परिसर ऋषिकेश के प्राचार्य प्रोफेसर गुलशन कुमार ढींगरा ने विश्व जल दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जल ही जीवन है क्योंकि जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती इसलिए हमें जल सरंक्षण पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। यूकॉस्ट जिला समन्वयक, कार्यशाला समन्वयक व डीएवी महाविद्यालय, देहरादून के रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत सिंह ने “वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट इन उत्तराखंड अंडर पीएमएयू” विषय पर बोलते हुए बताया कि जल स्रोतों की सीमित संख्या होने तथा बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण जल स्रोतों के उचित प्रबंधन की आवश्यकता है। प्रोफेसर प्रशांत सिंह ने बताया कि जितना खराब जल होगा उतनी अधिक बीमारियां होंगी और जितना स्वच्छ जल होगा उतनी कम बीमारियां इसलिए शुद्ध जल एवं पर्याप्त जल की उपलब्धता सामूहिक प्रयास होंगे। उन्होंने बताया कि राज्य के पेय जल स्रोतों का पीएमयू के माध्यम से लगातार वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है और लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अति विशिष्ट अतिथि डॉ० संतोष कुमार प्रोफेसर, कम्युनिटी एवं फैमिली मेडिसिन, एम्स ऋषिकेश ने बताया तेजी से बढ़ रहे अनियोजित शहरीकरण ने प्राकृतिक जल स्रोतों को विलुप्ति के कगार पर खड़ा कर दिया है। डॉ० संतोष कुमार ने शहरों के योजनागत विकास तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों के उचित प्रबंधन को आवश्यक बताया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में प्राचार्य स्वामी राम हिमालयन इंस्टिट्यूट जॉलीग्रांट के प्रोफेसर संजय कुमार गुप्ता अपने व्याख्यान में “पेयजल के माइक्रो बायोलॉजिकल पैरामीटर्स का विश्लेषण एवं अध्ययन पर विस्तार से बताया। उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र (यूसर्क) देहरादून के वैज्ञानिक डॉ० भवतोष शर्मा ने “स्प्रिंग वाटर क्वालिटी मॉनिटरिंग एंड हेल्थ एस्पेक्ट्स ऑफ ड्रिंकिंग वाटर क्वालिटी” विषय पर आमंत्रित व्याख्यान देते हुए जल की गुणवत्ता के फिजिकल, केमिकल पैरामीटर्स एवं बायोलॉजिकल पैरामीटर्स एवं इनके मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों के सतही जल में हार्डनेस, टीडीएस, टर्बिडिटी एवं बायोलॉजिकल प्रदूषण को स्थानीय स्तर पर उबाल कर, छान कर प्रयोग कर सकते हैं साथ ही साथ आरओ यूनिट के द्वारा बर्बाद हो रहे पानी को घर के अन्य कार्यों में प्रयोग करें एवं वर्षा जल संरक्षण, जल स्रोतों का संरक्षण करना चाहिए।
प्रशिक्षण कार्यशाला के तकनीकी सत्र में उत्तराखण्ड जल संस्थान, देहरादून के कैमिस्ट भगवान सिंह पंवार व फील्ड मैनेजर रजत मैठाणी द्वारा प्रतिभागियों को फील्ड टेस्टिंग किट के जरिए जल गुणवत्ता जांच की तकनीकियां बताई। इस दौरान 10 रासायनिक व जैवकीय जल गुणवत्ता मानकों की टेस्टिंग सही तरीके से करने पर मौजूद प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षण कार्यशाला में संस्थान के तथा सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, आवास विकास ऋषिकेश के 100 से अधिक प्रतिभागियों द्वारा भाग लिया गया। कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। सहायक प्राध्यापक डॉ.साफिया हसन ने अतिथियों का स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ० देव मणि त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर प्रोफेसर प्रशांत सिंह, प्रोफेसर गुलशन ढींगरा, डॉ भवतोष शर्मा, डॉ संतोष कुमार, डॉ संजय गुप्ता, डॉ साफ़िया हसन, राष्ट्रीय सेवा योजना के ऋषिकेश नगर कार्यक्रम समन्वयक मनोज कुमार गुप्ता, इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी के ओमप्रकाश गुप्ता, प्रोफेसर स्मिता बडोला, अमेरिका की डॉ० गैरी उपस्थित रहे।
